पश्चिम एशिया के ताजा संकट के लिए अमेरिका जिम्मेदार :ईरान

AajNoida 01/13/2020 विदेश

 माॅस्को । ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहनी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में निर्मित ताजा संकट के लिए अमेरिका जिम्मेदार है तथा अमेरिका की आेर से क्षेत्र में किये गये अपराध की वैश्विक स्तर पर खुलकर निंदा की जानी चाहिए।

 
राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा और शांति के लिए क्षेत्रीय देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
 
राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि श्री रोहानी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफन लोफवेन के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान यह बात कही। श्री रोहानी ने कहा,“क्षेत्र की ताजा स्थिति के लिए अमेरिका जिम्मेदार है और क्षेत्र में अमेरिका की ओर से किये गये अपराध की हम सभी को स्पष्ट रुप से कड़ी निंदा करनी चाहिए।”
 
श्री रोहानी ने कहा कि ईरान की ओर से इराक स्थिति अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत किया गया और यह अपराध नहीं था। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का समाधान एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए केवल क्षेत्रीय देशों द्वारा राजनीतिक वार्ता के माध्यम से हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा,“ क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बहाल करने के लिए हम सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए।”स्वीडन के प्रधानमंत्री ने स्टेफन लोफवेन ने श्री रोहानी के साथ बातचीत के दौरान आठ जनवरी को यूक्रेन हवाई हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए स्वीडन समेत सभी देशों के पीड़ितों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना जाहिर की।
इस बीच सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट करके कहा कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि ईरान बातचीत के लिए आगे आता है अथवा नहीं।
इसके पहले व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट वारेन ने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान पर बहुत दबाव है और उसका दम घूंट रहा है। वह आखिर में बातचीत के लिए आगे आयेगा।
अमेरिका ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर तुर्की से भी बातचीत की। अमेरिकी राष्ट्रपति माइक पोम्पियो ने तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुट सावओग्लु से पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए क्षेत्र की स्थिति में सुधार के लिए उत्‍तरी एटलांटिक संधि संगठन (नाटो )की भूमिका की आवश्यकता दोहराई। श्री पोम्पियो ने सीरिया में शांति प्रक्रिया के लिए अमरिका की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
श्री ट्रम्प ने शनिवार को कहा था कि ईरान अपने देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को मारे नहीं। उसे शीघ्र अपने इस कदम पर रोक लगानी चाहिए।ईरान के आमिरकबीर तकनीकी विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र ईरान की ओर से दागे गये मिसाइल के कारण के बोइंग 737-800 विमान पर सवार कुल 176 लोग के मारे जाने को श्रद्धांजलि देने के लिए शनिवार को विरोध प्रदर्शन करके लिए राजधानी बगदाद में एकत्र हुए। शीघ्र ही यह जमावबाडा एक रैली में तब्दील हो गया और लोगों ने उग्र नारे लगाये तथा अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गये शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीर को कथित तौर पर फाड़ी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया था।
ईरान के बोइंग 737-800 विमान पर कुल 176 लोग सवार थे जिनमें ईरान के 82,कनाडा के 63, यूक्रेन के 11 ,स्वीडन के 10 ,अफगानिस्तान के चार और जर्मनी तथा ब्रिटेन के तीन-तीन नागरिक थे। यात्रियों में ज्यादतर छात्र थे। विमान के यूक्रेन के कीव के लिए उड़ान भरने के चंद मिनट के अंदर ही वह आग के गोले में तब्दील हो कर गिर गया जिसमें सभी 176 लोग मारे गये। कनाडा,अमेरिका ,ब्रिटने आदे समेत कई देशों ने विमान के ईरान की कार्रवाई में दुर्घटनाग्रस्त होने का आरोप लगाया था लेकिन खाड़ी देश के कई तर्क देकर उनके आरोपों को सिरे से खारिज किया था। हालांकि कनाडा ने कहा था कि उसके पास ईरान द्वारा विमान गिराये जाने की खुफिया रिपोर्ट हैं जिसको लेकर ईरान ने उससे इस संबंध में सूचना साझा करने की बात की थी।
इस बीच ईरानी सेना ने शनिवार को अप्रत्याशित रुप से एलान किया कि मानवीय भूल के कारण विमान को मार गिराया गया और इसके लिए देश ने सभी संबद्ध पक्षों से माफी मांगी थी। उसने इसके लिए जिम्मेदार अपने लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी भरोसा दिया।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर के मारे जाने के बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान के नेतृत्व ने प्रतिशोध लेते हुए इराक स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रॉकेट दोगे। अमेरिका ने हालांकि कहा था कि इस हमले में उसका कोई भी जवान हताहत नहीं हुआ है लेकिन ईरान का दावा था कि कम से कम 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं।
ईरान के इस कदम के बाद अमेरिका के उसके खिलाफ कई नये कड़े प्रतिबंध लगा दिये। ईरान ने इसके बाद रविवार को इराक के सलाहुद्दीन प्रांत में सेना के बालद वायु सैनिक अड्डे को निशाना बनाकर रॉकेट हमले किये जिसमें कम से कम चार सैनिक घायल हाे गए। इस हमले में हालांकि किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है।
इससे पहले अमेरिकी सेना द्वारा इस सैन्य अड्डे का उपयोग किया जाता था। बालद वायु सैनिक अड्डा राजधानी बगदाद से करीब 90 किलोमीटर दूर है।