सावन महीने में पहले दिन घर लाएं ये 7 चीज

AajNoida 07/15/2019 ज्योतिष

 17 जुलाई से सावन का पावन महीना ( sawan month ) शुरू हो रहा है। इस पावन महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। भोलेनाथ के भक्त सावन सोमवार को व्रत रखते हैं। भगवान शिव ( Lord Shiva ) अपने भक्तों से प्रसन्न हो कर उनके जीवन में खुशियां भर देते हैं।

मान्यता के अनुसार, सावन महीने के पहले दिन कुछ खास चीजें लाने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। तो आइये जानते हैं सावन महीने के पहले दिन कौन सा चीज घर लाना चाहिए, जिससे भगवान शिव पहले दिन ही आपसे प्रसन्न हो जाएं और जीवन में अच्छे दिन की शुरुआत हो।

सावन महीने में पहले दिन घर में लाएं ये 7 चीजें

त्रिशूल

सावन के महीने के पहले दिन घर में चांदी का त्रिशूल लाना चाहिए। माना जाता है कि सावन के महीने में त्रिशूल घर में लाने से आपदाओं से रक्षा होती है और भगवान शिव पूरे साल आपदाओं से रक्षा करते हैं।

चांदी की डिब्बी में भस्म लाकर रखें

सावन महीने में शिव मंदिर से भस्म लाकर घर रखना चाहिए। माना जाता है कि भस्म से तिलक रखने से इंसान का दिल दिमाग हमेशा शुद्ध रहता है।

डमरू

सावन महीने के पहले दिन घर में डमरू जरुर लायें और सावन के आखिरी दिन ये डमरू किसी बच्चे को उपहार में दे दें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है। गौरतलब है कि डमरू भगवान शिव का पवित्र का वाद्य यंत्र है। माना जाता है इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

चांदी के नंदी घर में लाएं

नंदी भगवान शिव के सवारी हैं। नंदी को शक्ति, संपन्नता और कर्मठता का प्रतिक माना जाता है। यही कारण है कि सावन महीने के पहले दिन चांदी के नंदी घर में लाना चाहिए।

जल पात्र

हो सके तो सावन महीने के पहले गंगाजल घर लाएं और उसी जल से सावन महीने में भगवना शिल का जलाभिषेक करें। अगर गंगाजल लाना संभव नहीं हो तो चांदी, तांबे, पीतल के पात्र में स्वच्छ जल भरकर भगवान शिव को अर्पित करें। ऐसा करने से धन संबंधी समस्या खत्म हो जाएगी।

घर में रखें रुद्राक्ष

सावन महीने में भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए पहेल दिन रुद्राक्ष लाएं और सावन महीने में धारण करें। ऐसा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद बना रहता है।

सर्प

सावन महीने के पहले दिन चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा घर में लाकर उसकी पूजा करें और सावन के अंतिम दिन इन्हें किसी शिव मंदिर में ले जाकर रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से कालसर्प योग और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।