क्या मोटापे से कमजोर होती है याददाश्त?

AajNoida 08/04/2018 हेल्थ

हेल्थ. लोगों का मानना है कि मोटापा सौ बीमारियों की एक बीमारी है। इससे कई तरह की बीमारीयां हो सकती है। इससे ब्लड प्रेशर की शिकायत हो जाती है, आप चलने-फिरने से, शुगर का बढ़ने जैसी कई बीमारीयां हो जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मोटापा याददाश्त कमज़ोर करता है। शायद आपको इस बात का कोई इल्म नहीं होता है कि अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी को भी जन्म देता है। जी हां वैज्ञानिकी रिसर्च साबित भी करती है कि मोटापे और याददाश्त में दो-तरफ़ा रिश्ता होता है। दोनों आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लूसी चेक ने इस विषय पर अपने लैब प्रयोग किया है और इसका नाम था ट्रेजर हंट। वैज्ञानिकों ने जिन प्रतिभागियों का बीएमआई (BMI) ज़्यादा था, उनकी याददाश्त ज़्यादा कमज़ोर थी। जानकारी के लिए बता दे कि बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) यानि लंबाई के मुताबिक वज़न का होना। ऐसे ही अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने इसी विषय पर भी एक रिसर्च की थी। जिसके नतीजे में पाया गया कि अधेड़ उम्र के ऐसे लोग, जिनके पेट पर चर्बी ज़्यादा थी उनका ज़हन दुबले-पतले अधेड़ उम्र वालों के मुक़ाबले ज़्यादा कमज़ोर होता है। वैज्ञानिकों ने यादाश्य के लिए बढ़ते-घटते वज़न और खाने की आदतों पर ध्यान दिया गया।